बहुत याद
आता है बहना तेरा मुझे भैया कहकर बुलाना !!
वो मंद मंद मुस्काना और वो झूठा गुस्सा दिखाना ,
समझना मेरी हर तकलीफ को और मुझे हर बात समझाना ,
वो एक दुझे से लड़ना और फिर एक दुझे को चिडाना ,
बहुत याद आता है बहना तेरा मुझे भैया कहकर बुलाना !
वो एक दुझे से अपनी हर बात बताना ,
सुनके मेरे किस्से कहानिया तुम्हारा ज़ोर से हंसना ,
मेरी हर गलती पे लगाना डांट और फिर उस डांट के बाद मुझे समझाना ,
कोई और न होगा तेरे जैसा यह आज मैंने है जाना ,
वो राखी-भाईदुझ पर मेरे माथे टिका लगाना ,
वो उपहार के लिए मुझे परेशान करना
खिलाना मुझे मिठाई प्यार से और दिल से दुआ देना ,
कलाई पर बाँध के राखी.. अपना फर्ज निभाना !
कभी बन जाना दोस्त मेरी तो कभी माँ बन जाना ,
देना नसीहतें मुझे और अपना हुकम चलाना ,
जब छाये गम का अँधेरा तो खुशी की किरण बनके आना ,
हाँ तुम्ही से तो सिखा है मैंने हँसना - मुस्कुराना ,
मन कहता है मेरा की तुझसे दूर अब एक लम्हा भी नही बिताना ,
रिश्ता है एक खून का अब तो बस संग ही रहना ,
है बहुत से एहसास इस दिल में समाये , नहीं जनता कैसे कहना,
बस.. जान ले इतना.. बहुत याद आता है बहना तेरा मुझे भैया कहकर बुलाना !
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