Sunday, 24 March 2013

बहुत याद आता है बहना तेरा मुझे भैया कहकर बुलाना !!

बहुत याद आता है बहना तेरा मुझे भैया कहकर बुलाना !!

वो मंद मंद मुस्काना और वो झूठा गुस्सा दिखाना
,
समझना मेरी हर तकलीफ को और मुझे हर बात समझाना
,
वो एक दुझे से लड़ना और फिर एक दुझे को चिडाना
,
बहुत याद आता है बहना तेरा मुझे भैया कहकर बुलाना !


वो एक दुझे से अपनी हर बात बताना
,
सुनके मेरे किस्से कहानिया तुम्हारा ज़ोर से हंसना
,
मेरी हर गलती पे लगाना डांट और फिर उस डांट के बाद मुझे समझाना
,
कोई और न होगा तेरे जैसा यह आज मैंने है जाना
,

वो राखी-भाईदुझ पर मेरे माथे टिका लगाना
,
वो उपहार के लिए मुझे परेशान करना

खिलाना मुझे मिठाई प्यार से और दिल से दुआ देना
,
कलाई पर बाँध के राखी.. अपना फर्ज निभाना !


कभी बन जाना दोस्त मेरी तो कभी माँ बन जाना
,
देना नसीहतें मुझे और अपना हुकम चलाना
,
जब छाये गम का अँधेरा तो खुशी की किरण बनके आना
,
हाँ तुम्ही से तो सिखा है मैंने हँसना - मुस्कुराना
,

मन कहता है मेरा की तुझसे दूर अब एक लम्हा भी नही बिताना
,
रिश्ता है एक खून का अब तो बस संग ही रहना
,
है बहुत से एहसास इस दिल में समाये
, नहीं जनता कैसे कहना,
बस.. जान ले इतना.. बहुत याद आता है बहना तेरा मुझे भैया कहकर बुलाना !

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