दहेज़ !!
आज
फिर मेरा कलेजा चिर गया,दहेज़ का दानव फिर किसी की जान लील गया.
एक लड़की.. शादी कर अनजाने घर वो आती है ,
बहु नहीं , एक बेटी बनने की कोशिश करती है.
फिर ऐसा क्यूँ होता है , पैसो से क्यूँ उसका मोल आँका जाता है,
दहेज़ की खातिर क्यूँ उसे प्रताड़ित किया जाता है.
क्या होता होगा जब उसके माँ-बाप को पता चलता होगा ,
देख बेटी की ये दशा … कलेजा मुह को आता होगा.
क्यूँ तुम्हे बहु से नहीं , पैसो से प्यार है,
पति का भी देखो कितना कठोर व्यवहार है.
जरा सोचो.. तुमने भी तो बेटी जनी है.
वो भी तो किसी घर की बहु बननी है.
कल को उसके साथ भी ऐसा होगा ,
क्या तुमसे वो सहन होगा ,
अरे .. अब तो संभलो !! इस दहेज़ के दानव को रोको.
अपने लालच की खातिर मत किसी को आग में झोंको.
तुम्हारी बहु भी तो किसी की बहिन , किसी की बेटी है,
अब भी न संभाले तो इस दहेज़ की आग में तुम्हारी बेटी हैं !!

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