ऐ
प्रिये
सुनो.
!!
ऐ
प्रिये
सुनो...
अच्छा
लगता है..
जब
तुम रूठती हो..
जब
तुम डांटती हो..
पर
मैं जानता हूँ.. तुम बेपनाह प्यार करती हो !
ऐ प्रिये सुनो..
मेरी
धडकनों में तुम हो..
मेरी
साँसों में तुम हो..
बारिश
जो बरसे तो उसकी ठंडक तुम हो..
धुप
जो निकले तो उसकी रौशनी तुम हो..
ऐ
जाना.. इतना तो जानता हूँ में.. मेरी बहार तुम हो !
ऐ
प्रिये सुनो..
अच्छा
लगता हैं..
तुम्हारी
दांत पर हँसना..
तुम्हारे
बोलने पर चुप होना..
वो
तिरछे नैनो से देखना..
पर
मैं जानता हूँ .. रूठ कर भी तुम ही मुझे मनाती हो !
ऐ
प्रिये.. आज तुम सुन लो..
तुमसे
बेपनाह प्यार करता हूँ..
यकीन
मानो.. हद से ज्यादा चाहता हूँ..
इतना
जान लो.. एक दूजे के लिए हम हैं..
और
ये भी सच हैं की एक दूजे से हम हैं !!
© पुनीत
जैन 'चीनू'

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