Sunday, 24 March 2013

मेरी बहना !!!


मेरी बहना !!!

रो उठता हैं दिल जब याद तुम्हारी आती हैं,
रिश्ते होकर भी क्यू परायेपन की दीवार आती हैं !

जानता हूँ बड़ी मुश्किल से खुद को अलग किया होगा,
सीने पर पत्थर बड़ा रख लिया होगा,
सच कहता हूँ, लोगो की बातो में आगयी तुम बहना,
अपने भाई को तुम पहचान ना पायी बहना !

पर सच मानो बहना..
हर पल तुमको अपना माना था,
इस पवित्र धागे को खुदा का वरदान माना था,
खुद को खुशनसीब समझा था !

लेकिन रिश्ते की दूर कमजोर निकल गयी,
वक़्त और हालत से कोशिशे हार गयी,
दुनिया की गलतफेहमियो से तुम दूर हो गयी,
और इस तरह एक भाई की कलाई सुनी हो गयी !

जानता हूँ वो वक़्त आएगा,
वो धागा मेरी कलाई पर सज जाएगा,
आज भी खुदा से दुआ करता हूँ,
हर जन्म तुम्ही को बहन मांगता हूँ !!

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