Sunday, 24 March 2013

वक़्त तो लगेगा ही !!


वक़्त तो लगेगा ही !!

दास्ताँ-ऐ-दिल बताने में वक़्त तो लगेगा ही,
जिंदगी की किताब सुनाने में वक़्त तो लगेगा ही !

रूह एक हैं, फिर भी अलग सा रहता हूँ,
यार... एक होने में वक़्त तो लगेगा ही !

गुलशन-ऐ-मोहब्बत को खून-ऐ-दिल से सींचा हैं,
मोहब्बत के गुल खिलने में वक़्त तो लगेगा ही !

हमसे तुमने एहसासों की डोर बांध रखी हैं,
उसको भूल जाने में वक़्त तो लगेगा ही !

दरमियान हमारे हैं कई रिश्ते,
अब उन रिश्तो को तोड़ने में वक़्त तो लगेगा ही !

तिनका –तिनका लाना हैं, चुन के सारे गुलशन से,
खुद का ठिकाना बनाने में वक़्त तो लगेगा ही !

हम पर इस दिल ने कई जुल्म किये है ऐ शहजादी,
ये दर्द भुलाने में वक़्त तो लगेगा ही !!

© पुनीत जैन 'चीनू'

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