वक़्त तो लगेगा ही !!
दास्ताँ-ऐ-दिल
बताने में वक़्त तो लगेगा ही,
जिंदगी
की किताब सुनाने में वक़्त तो लगेगा ही !
रूह
एक हैं, फिर भी अलग सा रहता हूँ,
यार...
एक होने में वक़्त तो लगेगा ही !
गुलशन-ऐ-मोहब्बत
को खून-ऐ-दिल से सींचा हैं,
मोहब्बत
के गुल खिलने में वक़्त तो लगेगा ही !
हमसे
तुमने एहसासों की डोर बांध रखी हैं,
उसको
भूल जाने में वक़्त तो लगेगा ही !
दरमियान
हमारे हैं कई रिश्ते,
तिनका
–तिनका लाना हैं, चुन के सारे गुलशन से,
खुद
का ठिकाना बनाने में वक़्त तो लगेगा ही !
हम
पर इस दिल ने कई जुल्म किये है ऐ शहजादी,
ये
दर्द भुलाने में वक़्त तो लगेगा ही !!
© पुनीत जैन 'चीनू'

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