Pyaar, Dard Or Tanhaiyaan
Zindagi Shayad Isi Ka Naam hai; Pyar, Dard Or Tanhayian.!! M Here To Share My Feelings... Ehsaas Likhta Hu, Ehsaas Samajhta Hu.. Ehsaaso Se Mujhe Pyaar Hai.. Ehsaaso Se Hi CHalta Mera Shabdo Ka Bahav Hai.. !! ♥ Mere Ta'ruf k liye itna hi kehta hu, Apne pyar ke dum par sab k dil me rehta hu !! ♥ © Puneet Jain 'Chinu'
Friday, 26 September 2014
बहुत मजबूर हूँ !!
घर से दूर हूँ, बहुत मजबूर हूँ,
अपनों से दूर हूँ, बहुत मजबूर हूँ !
कुछ पाने की चाहत में चूर हूँ,
अकेला हूँ, क्या करूँ, मजबूर हूँ !
अपनों की भीड़ में एक शुर हूँ,
गैरों के बीच अकेला, मजबूर हूँ !
फौलादी इरादों से भरपूर हूँ,
टूट जाता हूँ खुद से, मजबूर हूँ !
ओढ़ चादर थकन की सो जाता हूँ,
दिलबर का साथ नहीं, मजबूर हूँ !
पी पानी भूख अपनी मिटाता हूँ,
पैसा है जेब में मेरे, पर मजबूर हूँ !
हालातों से किया है हर समझौता,
रिश्तों से कर नहीं पाया, मजबूर हूँ !
जानता हूँ, है दिल मेरा पत्थर सा,
कर नहीं सकता मोम, मजबूर हूँ !
हर एहसास, हर भाव दिल में बसता है,
डरता हूँ जाहिर करने को, मजबूर हूँ !
अपनों से ही तो जीने के अरमान हैं,
जाना चाहता हूँ दूर, पर मजबूर हूँ !
हो गया हूँ मैं अब वक़्त के हवाले,
क्यूंकि... मैं मजबूर हूँ.. बहुत मजबूर हूँ !
© पुनीत जैन 'चीनू'
अपनों से दूर हूँ, बहुत मजबूर हूँ !
कुछ पाने की चाहत में चूर हूँ,
अकेला हूँ, क्या करूँ, मजबूर हूँ !
अपनों की भीड़ में एक शुर हूँ,
गैरों के बीच अकेला, मजबूर हूँ !
फौलादी इरादों से भरपूर हूँ,
टूट जाता हूँ खुद से, मजबूर हूँ !
ओढ़ चादर थकन की सो जाता हूँ,
दिलबर का साथ नहीं, मजबूर हूँ !
पी पानी भूख अपनी मिटाता हूँ,
पैसा है जेब में मेरे, पर मजबूर हूँ !
हालातों से किया है हर समझौता,
रिश्तों से कर नहीं पाया, मजबूर हूँ !
जानता हूँ, है दिल मेरा पत्थर सा,
कर नहीं सकता मोम, मजबूर हूँ !
हर एहसास, हर भाव दिल में बसता है,
डरता हूँ जाहिर करने को, मजबूर हूँ !
अपनों से ही तो जीने के अरमान हैं,
जाना चाहता हूँ दूर, पर मजबूर हूँ !
हो गया हूँ मैं अब वक़्त के हवाले,
क्यूंकि... मैं मजबूर हूँ.. बहुत मजबूर हूँ !
© पुनीत जैन 'चीनू'
जिंदगी में बढ़ रही है नादानियाँ.. !!
जिंदगी में बढ़ रही है नादानियाँ,
नित नयी खड़ी हो रही परेशानियाँ !
जाने कैसे बयां करुँ एहसासों को,
होंठो से चिपक बैठी है खामोशियाँ !
भूले भी तो कैसे भूले उनकी बेवफाई,
जर्रे-जर्रे पे छपी है उनकी निशानियाँ !
नफरत करे भी तो करे किस हक़ से ?
इतनी है उनकी हम पर मेहरबानियाँ !
कैसे फाड़े इश्क़ की किताबों के वो पन्ने ?
हो चुकी है आम हमारे इश्क़ की कहानियाँ !
इन्तजार है..कोई तो फैला दे रोशनियाँ,
नित नयी अब खड़ी हो रही परेशानियाँ !
© पुनीत जैन 'चीनू'
नित नयी खड़ी हो रही परेशानियाँ !
जाने कैसे बयां करुँ एहसासों को,
होंठो से चिपक बैठी है खामोशियाँ !
भूले भी तो कैसे भूले उनकी बेवफाई,
जर्रे-जर्रे पे छपी है उनकी निशानियाँ !
नफरत करे भी तो करे किस हक़ से ?
इतनी है उनकी हम पर मेहरबानियाँ !
कैसे फाड़े इश्क़ की किताबों के वो पन्ने ?
हो चुकी है आम हमारे इश्क़ की कहानियाँ !
इन्तजार है..कोई तो फैला दे रोशनियाँ,
नित नयी अब खड़ी हो रही परेशानियाँ !
© पुनीत जैन 'चीनू'
Friday, 22 August 2014
थोड़ी तो पीने दे !
मिटा चूका हूँ लकीरे दर्द की;
सुकून से कुछ पल तो जीने दे,
बंद होने को है अब मयखाना,
यादों में उसकी थोड़ी तो पीने दे !
बसा चूका हूँ लहुँ में उसको;
चैन से उसको रगों में बहने दे,
हो गयी है ये सांसें भी नशीली;
रोकने को उन्हें थोड़ी तो पीने दे !
ख्वाबों में ख़यालों में बस तुम्ही हो;
काश! कुछ पल तो हकीकत होने दे,
पार हुई अब इंतजार की बेइंतेहा हदें,
करने को हकीकत थोड़ी तो पीने दे !
ख्वाबों से अब हकीकत हुई;
जिंदगी तेरे नाम की जीने दे,
भूलने को अपने दर्द-ओ-गम;
आखिरी बार.. थोड़ी तो पीने दे !
© पुनीत जैन 'चीनू'
सुकून से कुछ पल तो जीने दे,
बंद होने को है अब मयखाना,
यादों में उसकी थोड़ी तो पीने दे !
बसा चूका हूँ लहुँ में उसको;
चैन से उसको रगों में बहने दे,
हो गयी है ये सांसें भी नशीली;
रोकने को उन्हें थोड़ी तो पीने दे !
ख्वाबों में ख़यालों में बस तुम्ही हो;
काश! कुछ पल तो हकीकत होने दे,
पार हुई अब इंतजार की बेइंतेहा हदें,
करने को हकीकत थोड़ी तो पीने दे !
ख्वाबों से अब हकीकत हुई;
जिंदगी तेरे नाम की जीने दे,
भूलने को अपने दर्द-ओ-गम;
आखिरी बार.. थोड़ी तो पीने दे !
© पुनीत जैन 'चीनू'
बस उनके हाथों से जाम छलकने की देर है !
मौसम खुशनुमा है, शाम होने की देर है,
करीब है वो हमारे, गले लगाने की देर है,
हो जाएगा ये आलम भी नशीला-नशीला,
बस उनके हाथों से जाम छलकने की देर है !
फ़िज़ा में मदहोशी है, सितारों के आने की देर है,
शमा भी महक जाएगी, चाँद के आने की देर है,
चढ़ जाएगा हमें भी सुरूर मोहब्बत का हौले-हौले,
बस उनके हाथों से जाम छलकने की देर है !
हाथों में है जान हमारे, बस दीदार की देर है,
लिखी है किस्मत लहू से, उनके हां की देर है,
एक हो जाएंगे मिलन के जाम एक-दुझे से,
बस उनके हाथों से जाम छलकने की देर है !
© पुनीत जैन 'चीनू'
Wednesday, 20 August 2014
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
जीवन की नैया है बीच मझधार...
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
न मंजिल का पता है ना सारथी कोई,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
मिले थे दिल जिनसे, टूटे है अब वो,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
बुझाई है उम्मीदों की शमा खुद से,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
अपने सपनों को कुचला औरों की खातिर,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
दिल में एहसासों को अपने दफन किया,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
जीता हूँ औरों के लिए, खुद के लिए नहीं,
शायद इसीलिए मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
© पुनीत जैन 'चीनू'
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
न मंजिल का पता है ना सारथी कोई,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
मिले थे दिल जिनसे, टूटे है अब वो,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
बुझाई है उम्मीदों की शमा खुद से,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
अपने सपनों को कुचला औरों की खातिर,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
दिल में एहसासों को अपने दफन किया,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
जीता हूँ औरों के लिए, खुद के लिए नहीं,
शायद इसीलिए मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
© पुनीत जैन 'चीनू'
Friday, 1 August 2014
मिलन की आस.. फिर से एक बार.. !!
कैसे पूछूं रातों के वो फ़साने,
नहीं मिलते बातों के वो बहाने,
प्यार की रौशनी बुझ सी गयी,
अब नहीं आतें सपने वो सुहाने !
खलती है कमी उन बिखरी जुल्फों की,
हाथों से मिटानी पड़ती है दास्ताँ टीके की,
वो चादर में नहीं आती अब सिलवटें,
आदत हो गयी है, तकिये से आंसू पोछने की !
मौसम जो बरसातों के फिर से आएं,
दिल में यादों की आग फिर लगायें,
इन्ही मौसमों ने खंजर है चुभाएं,
तुमसे लिपटने में दिल अब घबराएं !
फूल हमारी यादों के मुरझायें,
बातें..वादें... नश्तर है चुभायेें,
ये वक़्त का फेर ही तो है जानेजाना,
बेदर्दी से एक-दुझे का हाथ है छुडाएं!
वो झूठा गुस्सा सच्चा हो गया,
मनाने का मेरा हक़ ख़त्म हो गया,
वो वादे, वो कसमे,वो प्यार तेरा,
सब कुछ बेगाना सा हो गया !
इतना दूर न करो मुझे खुदसे,
रह नहीं पाउँगा अब दूर तुमसे,
रिश्तें को फिर से हसीं नाम दे,
जर्रा-जर्रा दिल का जुड़ा है तुमसे !
© पुनीत जैन 'चीनू'
नहीं मिलते बातों के वो बहाने,
प्यार की रौशनी बुझ सी गयी,
अब नहीं आतें सपने वो सुहाने !
खलती है कमी उन बिखरी जुल्फों की,
हाथों से मिटानी पड़ती है दास्ताँ टीके की,
वो चादर में नहीं आती अब सिलवटें,
आदत हो गयी है, तकिये से आंसू पोछने की !
मौसम जो बरसातों के फिर से आएं,
दिल में यादों की आग फिर लगायें,
इन्ही मौसमों ने खंजर है चुभाएं,
तुमसे लिपटने में दिल अब घबराएं !
फूल हमारी यादों के मुरझायें,
बातें..वादें... नश्तर है चुभायेें,
ये वक़्त का फेर ही तो है जानेजाना,
बेदर्दी से एक-दुझे का हाथ है छुडाएं!
वो झूठा गुस्सा सच्चा हो गया,
मनाने का मेरा हक़ ख़त्म हो गया,
वो वादे, वो कसमे,वो प्यार तेरा,
सब कुछ बेगाना सा हो गया !
इतना दूर न करो मुझे खुदसे,
रह नहीं पाउँगा अब दूर तुमसे,
रिश्तें को फिर से हसीं नाम दे,
जर्रा-जर्रा दिल का जुड़ा है तुमसे !
© पुनीत जैन 'चीनू'
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