मौसम खुशनुमा है, शाम होने की देर है,
करीब है वो हमारे, गले लगाने की देर है,
हो जाएगा ये आलम भी नशीला-नशीला,
बस उनके हाथों से जाम छलकने की देर है !
फ़िज़ा में मदहोशी है, सितारों के आने की देर है,
शमा भी महक जाएगी, चाँद के आने की देर है,
चढ़ जाएगा हमें भी सुरूर मोहब्बत का हौले-हौले,
बस उनके हाथों से जाम छलकने की देर है !
हाथों में है जान हमारे, बस दीदार की देर है,
लिखी है किस्मत लहू से, उनके हां की देर है,
एक हो जाएंगे मिलन के जाम एक-दुझे से,
बस उनके हाथों से जाम छलकने की देर है !
© पुनीत जैन 'चीनू'
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