Thursday, 24 April 2014

साथिया ये तूने क्या किया !!

साथिया ये तूने क्या किया,
प्यार को मेरे फना किया,
बेताबी बेकरारी थी प्यार में,
तूने फिर क्यूँ उसे रुस्वा किया !

हमनवा ये तूने क्या किया,
देकर सब कुछ छीन लिया,
क्या कसक थी प्यार में मेरे ?
एहसासों से मेरे शिकवा किया !

© पुनीत जैन 'चीनू'

Tuesday, 22 April 2014

घर से निकलते ही एक तेरा ख़याल आता है !!

घर से निकलते ही एक तेरा ख़याल आता है,
चंद कदम बढ़ाते ही रास्तों का सैलाब आता है,
मंजिल की कश्मकश में होशों हवास खो बैठा हूँ,
अब तो ऐ दिलरुबा बतला दे ... किस रास्ते पर तेरा मकान आता है !

आँखे जो बंद करू तो तेरा नशा-सा छाता है,
ख्वाब जो टूटे तो धुँआ धुँआ नजर आता है,
बंद कमरे मैं बैठा तेरी खुशबू महसूसता हूँ,
खिड़की जो खोलूँ तो तेरा साया नजर आता हैं !

© पुनीत जैन 'चीनू'

Thursday, 3 April 2014

फिर किस बात का है तुम्हे अफ़सोस ?


सुनो ना... तुम्हे बेपनाह चाहता हूँ,
हर पल तुम्हे आँखों में समाता हूँ,
हंसी को तुम्हारी लबों पर बसाता हूँ,
फिर किस बात का है तुम्हे अफ़सोस ?

सुनो ना...एहसास तुम्हे मानता हूँ,
प्रीत के मीठे शब्दों में तुम्हे ढ़ालता हूँ,
ग़ज़लों में अपनी... तुम्हे गुनगुनाता हूँ,
फिर किस बात का है तुम्हे अफ़सोस ?

सुनो ना...हरपल तुम्हे पास रखता हूँ,
ख्वाबों में हाथ तुम्हारा थामे रखता हूँ,
तुम संग जिंदगी जीने कि आस रखता हूँ,
फिर किस बात का है तुम्हे अफ़सोस ?

सुनो ना...
थामना चाहता हूँ सातों जन्म तुम्हारा हाथ,
अब तो बतला दो...
फिर किस बात का है तुम्हे अफ़सोस ?

© पुनीत जैन 'चीनू'