Sunday, 29 June 2014

अबके सावन पहले-सी वो बरसात हो !!

अबके सावन पहले-सी वो बरसात हो,
दिल में तेरे-मेरे फिर वही ज़ज़्बात हो !

भीगने के बहाने कहीं तो मुलाकात हो,
इन बूंदों में कुछ तो शह और मात हो !

साथ चलने के बहाने कुछ तो बात हो,
कड़कती बिजलियों से कुछ तो खुराफात हो !


दिल में तेरे, मिलन के कुछ तो खयालात हो,
तपती दिल की जमीं पर नीर-सी सौगात हो !

भीगे केशुओं से खुशबू की कुछ तो शराफ़ात हो,
नजरों की मदहोश शबनम से एक पल बात हो !

दुआ है खुद से कुछ तो ऐसी इनायत हो,
अबके सावन पहले-सी फिर वो बरसात हो !

© पुनीत जैन 'चीनू '