अबके सावन पहले-सी वो बरसात हो,
दिल में तेरे-मेरे फिर वही ज़ज़्बात हो !
भीगने के बहाने कहीं तो मुलाकात हो,
इन बूंदों में कुछ तो शह और मात हो !
साथ चलने के बहाने कुछ तो बात हो,
कड़कती बिजलियों से कुछ तो खुराफात हो !
दिल में तेरे, मिलन के कुछ तो खयालात हो,
तपती दिल की जमीं पर नीर-सी सौगात हो !
भीगे केशुओं से खुशबू की कुछ तो शराफ़ात हो,
नजरों की मदहोश शबनम से एक पल बात हो !
दुआ है खुद से कुछ तो ऐसी इनायत हो,
अबके सावन पहले-सी फिर वो बरसात हो !
© पुनीत जैन 'चीनू '
दिल में तेरे-मेरे फिर वही ज़ज़्बात हो !
भीगने के बहाने कहीं तो मुलाकात हो,
इन बूंदों में कुछ तो शह और मात हो !
साथ चलने के बहाने कुछ तो बात हो,
कड़कती बिजलियों से कुछ तो खुराफात हो !
दिल में तेरे, मिलन के कुछ तो खयालात हो,
तपती दिल की जमीं पर नीर-सी सौगात हो !
भीगे केशुओं से खुशबू की कुछ तो शराफ़ात हो,
नजरों की मदहोश शबनम से एक पल बात हो !
दुआ है खुद से कुछ तो ऐसी इनायत हो,
अबके सावन पहले-सी फिर वो बरसात हो !
© पुनीत जैन 'चीनू '

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