मिटा चूका हूँ लकीरे दर्द की;
सुकून से कुछ पल तो जीने दे,
बंद होने को है अब मयखाना,
यादों में उसकी थोड़ी तो पीने दे !
बसा चूका हूँ लहुँ में उसको;
चैन से उसको रगों में बहने दे,
हो गयी है ये सांसें भी नशीली;
रोकने को उन्हें थोड़ी तो पीने दे !
ख्वाबों में ख़यालों में बस तुम्ही हो;
काश! कुछ पल तो हकीकत होने दे,
पार हुई अब इंतजार की बेइंतेहा हदें,
करने को हकीकत थोड़ी तो पीने दे !
ख्वाबों से अब हकीकत हुई;
जिंदगी तेरे नाम की जीने दे,
भूलने को अपने दर्द-ओ-गम;
आखिरी बार.. थोड़ी तो पीने दे !
© पुनीत जैन 'चीनू'
सुकून से कुछ पल तो जीने दे,
बंद होने को है अब मयखाना,
यादों में उसकी थोड़ी तो पीने दे !
बसा चूका हूँ लहुँ में उसको;
चैन से उसको रगों में बहने दे,
हो गयी है ये सांसें भी नशीली;
रोकने को उन्हें थोड़ी तो पीने दे !
ख्वाबों में ख़यालों में बस तुम्ही हो;
काश! कुछ पल तो हकीकत होने दे,
पार हुई अब इंतजार की बेइंतेहा हदें,
करने को हकीकत थोड़ी तो पीने दे !
ख्वाबों से अब हकीकत हुई;
जिंदगी तेरे नाम की जीने दे,
भूलने को अपने दर्द-ओ-गम;
आखिरी बार.. थोड़ी तो पीने दे !
© पुनीत जैन 'चीनू'
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