Wednesday, 20 August 2014

फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !

जीवन की नैया है बीच मझधार...
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !

न मंजिल का पता है ना सारथी कोई,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !

मिले थे दिल जिनसे, टूटे है अब वो,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !

बुझाई है उम्मीदों की शमा खुद से,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !

अपने सपनों को कुचला औरों की खातिर,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !

दिल में एहसासों को अपने दफन किया,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !

जीता हूँ औरों के लिए, खुद के लिए नहीं,
शायद इसीलिए मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !

© पुनीत जैन 'चीनू'

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