जीवन की नैया है बीच मझधार...
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
न मंजिल का पता है ना सारथी कोई,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
मिले थे दिल जिनसे, टूटे है अब वो,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
बुझाई है उम्मीदों की शमा खुद से,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
अपने सपनों को कुचला औरों की खातिर,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
दिल में एहसासों को अपने दफन किया,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
जीता हूँ औरों के लिए, खुद के लिए नहीं,
शायद इसीलिए मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
© पुनीत जैन 'चीनू'
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
न मंजिल का पता है ना सारथी कोई,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
मिले थे दिल जिनसे, टूटे है अब वो,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
बुझाई है उम्मीदों की शमा खुद से,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
अपने सपनों को कुचला औरों की खातिर,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
दिल में एहसासों को अपने दफन किया,
फिर भी मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
जीता हूँ औरों के लिए, खुद के लिए नहीं,
शायद इसीलिए मुस्कुराहटें..अभी बाकी है !
© पुनीत जैन 'चीनू'
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