जिंदगी में बढ़ रही है नादानियाँ,
नित नयी खड़ी हो रही परेशानियाँ !
जाने कैसे बयां करुँ एहसासों को,
होंठो से चिपक बैठी है खामोशियाँ !
भूले भी तो कैसे भूले उनकी बेवफाई,
जर्रे-जर्रे पे छपी है उनकी निशानियाँ !
नफरत करे भी तो करे किस हक़ से ?
इतनी है उनकी हम पर मेहरबानियाँ !
कैसे फाड़े इश्क़ की किताबों के वो पन्ने ?
हो चुकी है आम हमारे इश्क़ की कहानियाँ !
इन्तजार है..कोई तो फैला दे रोशनियाँ,
नित नयी अब खड़ी हो रही परेशानियाँ !
© पुनीत जैन 'चीनू'
नित नयी खड़ी हो रही परेशानियाँ !
जाने कैसे बयां करुँ एहसासों को,
होंठो से चिपक बैठी है खामोशियाँ !
भूले भी तो कैसे भूले उनकी बेवफाई,
जर्रे-जर्रे पे छपी है उनकी निशानियाँ !
नफरत करे भी तो करे किस हक़ से ?
इतनी है उनकी हम पर मेहरबानियाँ !
कैसे फाड़े इश्क़ की किताबों के वो पन्ने ?
हो चुकी है आम हमारे इश्क़ की कहानियाँ !
इन्तजार है..कोई तो फैला दे रोशनियाँ,
नित नयी अब खड़ी हो रही परेशानियाँ !
© पुनीत जैन 'चीनू'

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