मेरी कलम ही मेरे सुख दुःख की साथी हैं,
साथ निभाया इसने बेजुबान बनकर !
साथ निभाया इसने बेजुबान बनकर !
जिंदगी के कारवा में सब छोड़ गए,
साथ निभाया इसने साथ बनकर !
जब जब बतला न सका अपने दर्द किसी को ,
बतलाया इसने सभी को शब्द बनकर !
जब निकल पड़ा सफ़र-ऐ-मंजिल को ,
राह दिखाई इसने हमराही बनकर !
जब छोड़ चली प्रीत मेरी ,
साथ निभाया इसने प्रियतम बनकर !
साथ निभाया इसने साथ बनकर !
जब जब बतला न सका अपने दर्द किसी को ,
बतलाया इसने सभी को शब्द बनकर !
जब निकल पड़ा सफ़र-ऐ-मंजिल को ,
राह दिखाई इसने हमराही बनकर !
जब छोड़ चली प्रीत मेरी ,
साथ निभाया इसने प्रियतम बनकर !
जब छाना चाह मैंने दुनिया पर,
सामने लाये ये मुझे एहसास बनाकर !
ऐ कलम , शुक्रगुजार हूँ में तेरा,
तेरी ही बदोलत लिख रहा हूँ एहसास मेरा !!
सामने लाये ये मुझे एहसास बनाकर !
ऐ कलम , शुक्रगुजार हूँ में तेरा,
तेरी ही बदोलत लिख रहा हूँ एहसास मेरा !!
© Puneet Jain 'Chinu'
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