सोच में डूबा हूँ
मैं !!
लिखना
चाहता हूँ कुछ,
कलम
है में खोई हुई,
और
मैं भी गुम हूँ कही !
कलम
हैं मेरी खामोश,
और
में भी खामोश हूँ कही !
कलम
हैं मेरी स्याही गिराती हुई,
और
आँखे हैं मेरी नीर बहती हुई !
आज
फिर मैं अपनी कलम ढून्ड़ता हूँ,
और
आज खुद को भी संवारता हूँ !
अपने
खोये हुए एहसासों को ढूंड कर,
शब्दों
मैं बाहर लाता हूँ !
चलो
आज फिर मैं कुछ नए गीत लिखता हूँ,
चलो
आज फिर सतरंगी सपने शब्दों मैं सजाता हूँ !!
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