पागल मनवा !!
रे पागल मनवा तू बेचैन क्यू हैं ,
क्यू उड़ गयी तेरी नींद , खोया दिल का चैन हैं !
नहीं सोया इतनी रातो से,
बतला ज़रा.. मन भरा हैं किन बातो से !
लिखने को नहीं हैं तेरे पास अल्फाज ,
बतला ज़रा किस बात से तू हैं मोहताज !
यार तेरे पास हैं , संगी-साथी तेरे अपने,
करता जा कोशिश मन से.. पुरे होंगे तेरे सपने !
ना जाने बैठा बैठा ये क्या लिख गया ,
शायद चिनू अपनी भावनाओ को फिर से शब्दों में ढाल गया !!
बतला ज़रा.. मन भरा हैं किन बातो से !
लिखने को नहीं हैं तेरे पास अल्फाज ,
बतला ज़रा किस बात से तू हैं मोहताज !
यार तेरे पास हैं , संगी-साथी तेरे अपने,
करता जा कोशिश मन से.. पुरे होंगे तेरे सपने !
ना जाने बैठा बैठा ये क्या लिख गया ,
शायद चिनू अपनी भावनाओ को फिर से शब्दों में ढाल गया !!
© Puneet Jain 'Chinu'
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