लो
फिर से आ गयी... दिसम्बर की सर्द राते,
दिल
में हलचल मचा गयी... दिसम्बर की सर्द राते,
क्यू
मन मेरा डोल देती हैं... दिसम्बर की सर्द राते,
क्यू
तनहा मुझे छोड़ देती हैं... दिसम्बर की सर्द राते,
के
तुम मुझे यु उदास ना करो... दिसम्बर की सर्द राते,
के
मेरे आस पास ही रहो... दिसम्बर की सर्द राते,
गीतों
में तुमको गुनगुनाता हूँ... दिसम्बर की सर्द राते,
आहो
में तुम्हे भरता हूँ... दिसम्बर की सर्द राते,
तुम
मेरे प्रेम का श्रृंगार हो... दिसम्बर की सर्द राते,
तुम
मेरे विरह की वेदना हो... दिसम्बर की सर्द राते,
मेरे
सीने में बस जाओ..बन के.. दिसम्बर की सर्द राते,
मेरी
आँखों में समां जाओ..बन के.. दिसम्बर की सर्द राते,
मुझे
अपना बना लो..बन के.. दिसम्बर की सर्द राते,
बड़ा
तडपती हैं ये... दिसम्बर की सर्द राते,
पर..
प्रेम जगती हैं... दिसम्बर की सर्द राते,
मुद्दतो
के
विरह के बाद.. अपना बनाती हैं... दिसम्बर की सर्द राते !!!
© पुनीत जैन 'चीनू'

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