Sunday, 24 March 2013

रोशन करे सवेरा !!

रोशन करे सवेरा !!

एक नयी सुबह को अपनी रौशनी दे रहा हैं
,
सारे जब को अपनी रौशनी दे रहा हैं !


दूर से तेरा स्वरुप विशाल लौ सा लग रहा हैं
,
आज नयी सुबह में जीने की प्रेरणा दे रहा हैं !


तुझ बिन श्रृष्टि का हर प्राणी अधुरा
,
तुझ बिन ये हरियाली
, ये धरती अम्बर अधुरा !

दिन भर खुद जला करता हैं
,
और शमा के चाँद को रौशनी अपनी देता हैं !


सुहागिन की बिंदी सा तू ताज हैं
,
ऐ सूरज
, तेरे हर रूप पर मुझे नाज हैं !

दुसरो की खातिर खुद तो जल रहा हैं
,
भटके हुओ को रौशनी की राह दिखला रहा हैं !


इस उगते सूरज ने मुझे आशा की नव किरण दी हैं
,
कहत चिनू
, इसीलिए मैंने इसको धीर-गंभीर की उपाधि दी हैं !

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