मैं भी अब बाल-लीला करना चाहता हूँ,
मैं भी अब सबको सताना चाहता हूँ !
मैं भी अब माखन चुराना चाहता हूँ ,
मैं भी अब दही हांड़ी तोडना चाहता हूँ !
मैं भी अब पानी की मटकियो पर कंकर मारना चाहता हूँ ,
मैं भी अब , डांट पड़ने पर, मैया के आँचल में छुपना चाहता हूँ !
मैं भी अब सबको सताना चाहता हूँ !
मैं भी अब माखन चुराना चाहता हूँ ,
मैं भी अब दही हांड़ी तोडना चाहता हूँ !
मैं भी अब पानी की मटकियो पर कंकर मारना चाहता हूँ ,
मैं भी अब , डांट पड़ने पर, मैया के आँचल में छुपना चाहता हूँ !
मैं भी अब गाये चराना चाहता हूँ,
मैं भी अब नदिया किनारे खेलना चाहता हूँ !
मैं भी अब गोपियों संग रास रचाना चाहता हूँ ,
मैं भी अब राधा रानी संग प्रीत लगाना चाहता हूँ !
मैं भी अब गोकुल में जाना चाहता हूँ ,
मैं भी अब वृन्दावन में धाम बसाना चाहता हूँ !
मैं भी अब कृष्ण बन-ना चाहता हूँ ,
मैं भी अब अपनी मोहक मुस्कान से सबको अपना बनाना चाहता हूँ !
मैं भी अब नदिया किनारे खेलना चाहता हूँ !
मैं भी अब गोपियों संग रास रचाना चाहता हूँ ,
मैं भी अब राधा रानी संग प्रीत लगाना चाहता हूँ !
मैं भी अब गोकुल में जाना चाहता हूँ ,
मैं भी अब वृन्दावन में धाम बसाना चाहता हूँ !
मैं भी अब कृष्ण बन-ना चाहता हूँ ,
मैं भी अब अपनी मोहक मुस्कान से सबको अपना बनाना चाहता हूँ !
© Puneet Jain 'Chinu'
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