** वक़्त और खुशियां **
सुनो ना...
कल एक मुलाकात हुई...
... वक़्त से !
बोला...
रे कहाँ था तू,
कितना ढूंढा तुझे,
पर हर बार..
वक़्त के फेर से तू आगे निकल गया !
हर पल... हर लम्हे...
तुझे कुछ देने की कोशिश की,
पर
तू तो बस सबको देने में ही लगा था !
ले... आज में तेरे हिस्से में आता हूँ,
ले... आज में तेरा नसीब बदलता हूँ !
ये वक़्त भी बड़ी अजीब चीज है,
कब, कहाँ, किस मोड़ पर बदल जाएँ
कोई नहीं जानता
पर
हर मोड़ पर
छोड़ देता हैं... अपनी निशानियां...
कुछ वादें,
कुछ ना भूलने वाली यादें,
दे जाता हैं मन में
ढेरों खुशियां, ढेरों सपने...
पर
कोई नहीं जानता...
कि ये कब बदल जाएँ...
मिलन की वेला विदाई बन जाएँ
और
दुखों के समंदर में...
खुशियों की बरखा हो जाएँ !
ये तो बस इतना जानता हैं...
जिसने
वक़्त के हर स्वरुप को
समझ लिया, जी लिया
वक़्त उसका हो लिया...
और
मैं तो बस इतना जानूं...
कि वक़्त जिसका हो लिया...
उसने सबकुछ पा लिया !
यही सोचकर...
मैंने भी
इसको समझने का
सोचा हैं,
सब कुछ पाने का ठाना हैं,
मेरे इस सपने में
तुम दोगी ना साथ मेरा....... !!!!
बताओ ना...
© पुनित जैन 'चीनू'
सुनो ना...
कल एक मुलाकात हुई...
... वक़्त से !
बोला...
रे कहाँ था तू,कितना ढूंढा तुझे,
पर हर बार..
वक़्त के फेर से तू आगे निकल गया !
हर पल... हर लम्हे...
तुझे कुछ देने की कोशिश की,
पर
तू तो बस सबको देने में ही लगा था !
ले... आज में तेरे हिस्से में आता हूँ,
ले... आज में तेरा नसीब बदलता हूँ !
ये वक़्त भी बड़ी अजीब चीज है,
कब, कहाँ, किस मोड़ पर बदल जाएँ
कोई नहीं जानता
पर
हर मोड़ पर
छोड़ देता हैं... अपनी निशानियां...
कुछ वादें,
कुछ ना भूलने वाली यादें,
दे जाता हैं मन में
ढेरों खुशियां, ढेरों सपने...
पर
कोई नहीं जानता...
कि ये कब बदल जाएँ...
मिलन की वेला विदाई बन जाएँ
और
दुखों के समंदर में...
खुशियों की बरखा हो जाएँ !
ये तो बस इतना जानता हैं...
जिसने
वक़्त के हर स्वरुप को
समझ लिया, जी लिया
वक़्त उसका हो लिया...
और
मैं तो बस इतना जानूं...
कि वक़्त जिसका हो लिया...
उसने सबकुछ पा लिया !
यही सोचकर...
मैंने भी
इसको समझने का
सोचा हैं,
सब कुछ पाने का ठाना हैं,
मेरे इस सपने में
तुम दोगी ना साथ मेरा....... !!!!
बताओ ना...
© पुनित जैन 'चीनू'
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