Sunday, 9 June 2013

लगा जैसे... !!!

सुनो !! कल ये ठंडी हवाएं कुछ कह रही थी,
लगा जैसे, शायद तुम्हारी याद दिला रही थी !

शब् की ठंडी बयारों ने कुछ ऐसे जकड रखा था,
लगा जैसे, शायद तुमने दिल को मेरे पकड़ रखा था !

वो शब् की आगोश में चांदनी खिलखिला रही थी,
लगा जैसे, हंसी तुम्हारी चहचहा रही थी !

वो तेज हवाओं से पत्ते नाच रहे थे,
लगा जैसे, हमारा प्रेम राग गा रहे थे !

हुआ उन फिजाओं का फिजाओं से मिलन,
की मौसम हुआ मस्ताना, रही न कोई शिकन !

आया तो था मिटाने को अपनी तन्हाई,
लगा जैसे, यादों की बज रही थी शहनाई !

ये हवाएं, ये यादें ही तो 'चीनू' का सहारा हैं,
जो जी लूं इनको तो जिन्दगी मेरी बहारा हैं !

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