Thursday, 21 February 2013

ऐ जाना सुनो !!

ऐ जाना सुनो...
अच्छा लगता है..
जब तुम रूठती हो..
जब तुम डांटती हो..
पर मैं जनता हूँ.. तुम बेपनाह प्यार करती हो !

ऐ जाना सुनो..
मेरी धडकनों में तुम हो..
मेरी साँसों में तुम हो..
बारिश जो बरसे तो उसकी ठंडक तुम हो..
धुप जो निकले तो उसकी रौशनी तुम हो..
ऐ जाना.. इतना तो जानता हूँ में.. मेरी बहार तुम हो !

ऐ जाना सुनो..
अच्छा लगता हैं..
तुम्हारी दांत पर हँसना..
तुम्हारे बोलने पर चुप होना..
वो तिरछे नैनो से देखना..
और मंद – मंद मुस्काना..
पर मैं जनता हु.. रूठ कर भी तुम ही मुझे मनाती हो !

ऐ जाना.. आज तुम सुन लो..
तुमसे बेपनाह प्यार करता हूँ..
यकीन मानो.. हद से ज्यादा चाहता हूँ..
इतना जान लो.. एक दुझे के लिए हम हैं..
और ये भी सच हैं की एक दुझे से हम हैं !!

© पुनीत जैन ‘चीनू’

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