नशा कुछ ऐसा !!!!!
नशा कुछ ऐसा !!!!!
आँखों में मेरे एक अजब नशा सा हैं,
इस हँसी में छुपा अपना बनाने का मज़ा सा है !
ये आँखे काफी हैं नशे में डुबाने के लिए,
ये मुस्कान काफी हैं अपना बनाने के लिए !!
मेरे दिल में जगह है उसी एक के लिए;
जो रहता हैं बन-के धड़कन हर पल के लिए !!
© कवि पुनीत जैन 'चीनू '
Gud one..Preeti'agyaat'
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