Thursday, 13 December 2012

नशा कुछ ऐसा !!!!!

नशा कुछ ऐसा !!!!!


आँखों में मेरे एक अजब नशा सा हैं,
इस हँसी  में छुपा अपना बनाने का मज़ा सा है !
ये आँखे काफी हैं नशे में डुबाने के लिए,
ये मुस्कान काफी हैं अपना बनाने के लिए !!
मेरे दिल में जगह है उसी एक के लिए;
जो रहता हैं बन-के धड़कन हर पल के लिए !!


 © कवि पुनीत जैन 'चीनू '

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